जापान ने भारतीय आमों पर लगाई रोक; फ्यूमिगेशन खामियों से अल्फांसो-केसर निर्यात प्रभावित
जापान ने भारतीय आमों पर लगाई रोक
-फ्यूमिगेशन में खामियां मिलने पर बड़ा फैसला केसर, अल्फांसो और लंगड़ा समेत कई किस्मों के निर्यात पर असर
-भारतीय आमों पर बढ़ती पाबंदियां ट्रीटमेंट प्लांट और फ्यूमिगेशन व्यवस्था फिर सवालों के घेरे में
एपीएमसी न्यूज नेटवर्क: 
भारत के आमों की मिठास दुनियाभर में मशहूर है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में अब भारतीय आमों पर लगातार सख्ती बढ़ती जा रही है। जापान द्वारा इस सीजन में भारतीय आमों के आयात पर रोक लगाने के बाद फिर यह सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर भारतीय निर्यात व्यवस्था में कमी कहां रह रही है।
मार्च 2026 में जापानी प्लांट क्वारंटाइन अधिकारियों ने भारत के ट्रीटमेंट सेंटर्स में फ्यूमिगेशन और सुरक्षा उपायों में खामियां पाईं। इसके बाद जापान ने भारतीय आमों की खेप स्वीकार करना बंद कर दिया।
इस फैसले से केसर, अल्फांसो, लंगड़ा और बंगनपल्ली जैसी लोकप्रिय किस्मों का निर्यात प्रभावित हुआ है।
सिर्फ जापान ही नहीं, पहले भी लग चुकी हैं पाबंदियां
भारतीय आमों पर पहले भी कई देशों ने अलग-अलग समय पर रोक या कड़े प्रतिबंध लगाए हैं।
ब्रिटेन (UK)
2014 में ब्रिटेन ने भारतीय आमों के आयात पर अस्थायी प्रतिबंध लगाया था। वजह थी भारतीय खेपों में कीड़े और फाइटोसैनिटरी मानकों का उल्लंघन। बाद में भारत द्वारा निरीक्षण और पैकिंग व्यवस्था सुधारने के बाद प्रतिबंध हटाया गया।
यूरोपीय संघ (EU)
यूरोपीय संघ ने भी 2014 में भारतीय आमों पर बैन लगाया था। कई खेपों में फल मक्खी (Fruit Fly) और क्वारंटाइन कीट मिलने के बाद यह कार्रवाई की गई थी। लगभग एक साल बाद भारत ने निर्यात प्रक्रिया मजबूत की, तब जाकर प्रतिबंध हट सका।
अमेरिका (USA)
अमेरिका ने भारतीय आमों के लिए बेहद कड़े फाइटोसैनिटरी नियम लागू किए हैं। पहले भी कुछ भारतीय निर्यात केंद्रों पर सवाल उठे थे। अमेरिकी बाजार में एक्सपोर्ट के लिए विशेष इर्रेडिएशन और ट्रीटमेंट प्रक्रिया अनिवार्य की गई है। नियमों में कमी मिलने पर कई बार खेप रोकी गई।
जापान
अब 2026 में जापान ने भारतीय ट्रीटमेंट प्लांट्स में फ्यूमिगेशन की कमियां मिलने के बाद 25 मार्च के बाद जारी सर्टिफिकेट वाली खेप स्वीकार करने से इनकार कर दिया है।
ट्रीटमेंट प्लांट्स पर फिर उठे सवाल
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के कई कृषि निर्यात ट्रीटमेंट प्लांट पुराने सिस्टम पर चल रहे हैं। फ्यूमिगेशन, निरीक्षण और पैकिंग में अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन नहीं होने से बार-बार भारतीय फलों की साख प्रभावित हो रही है।
कृषि निर्यात से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि यदि तत्काल सुधार नहीं किए गए तो भविष्य में अन्य देश भी भारतीय कृषि उत्पादों पर कड़ी कार्रवाई कर सकते हैं।
बढ़ती एयर कार्गो लागत से भी संकट
निर्यातकों के अनुसार अमेरिका और यूरोप भेजे जाने वाले आमों की एयर कार्गो लागत पिछले साल के मुकाबले लगभग दोगुनी हो चुकी है।
जहां पहले हवाई माल ढुलाई 250-350 रुपए प्रति किलो थी, वहीं अब यह 580-590 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई है। पश्चिम एशिया में तनाव, जेट ईंधन की महंगाई और एयरलाइन रूट बदलाव इसकी प्रमुख वजह बताए जा रहे हैं।
भारत के लिए टॉप 5 आम एक्सपोर्ट मार्केट
2025-26 में भारतीय आम, पल्प और प्रोसेस्ड उत्पादों के सबसे बड़े बाजार रहे अमेरिका,संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ब्रिटेन, नीदरलैंड, सऊदी अरब
सुधार नहीं हुए तो बढ़ सकती हैं मुश्किलें
विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय आमों की वैश्विक मांग आज भी मजबूत है, लेकिन गुणवत्ता और फाइटोसैनिटरी मानकों में लापरवाही देश की छवि खराब कर रही है। अब जरूरत है कि कृषि पणन मंडलों, निर्यात एजेंसियों और ट्रीटमेंट प्लांट्स में आधुनिक तकनीक और सख्त निगरानी लागू की जाए, ताकि भारतीय आमों की मिठास पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का कड़वापन हावी न हो।