मुंबई APMC मार्केट में 60% आवक घटी, “लाल मिर्च“ के दाम में तेजी.
-होलसेल मार्केट में कर्नाटक मिर्ची दोगुनी, तिखी 50% महंगी!
-3 साल बाद ‘लाल मिर्च’ में जोरदार तेजी! मुंबई APMC व्यापारी खुश – गृहिणियों का बजट ढीला
नवी मुंबई - मुंबई APMC होलसेल मसाला मार्केट में लाल मिर्ची की आवक लगभग 60 प्रतिशत कम हो गई है, जिसके चलते थोक बाजार में दामों में भारी बढ़ोतरी देखी जा रही है। व्यापारियों के अनुसार, क्रॉप कम होने और किसानों द्वारा कम बोआई करने से बाजार में सप्लाई घटी है। यदि फरवरी महीने में आवक नहीं बढ़ी, तो आने वाले समय में कीमतों में और उछाल संभव है।
मिर्ची के ताजा थोक भाव
कर्नाटक मिर्ची (ब्याड़गी) वर्तमान भाव: ₹300 से ₹550 प्रति किलो,पिछले वर्ष: लगभग ₹200–₹250 रुपए था ।मिर्च की कई क्वालिटी में दाम लगभग दोगुने है ।
कश्मीर मिर्ची वर्तमान भाव: ₹600 से ₹750 प्रति किलो । पिछले वर्ष: लगभग ₹300 प्रति किलो ,रंग और क्वालिटी के कारण अधिक मांग।
आंध्र (तेजा) मिर्ची -पिछले वर्ष: ₹150 प्रति किलो ,वर्तमान भाव: ₹250 प्रति किलो ,मार्केट मैं करीब 50% तक वृद्धि ।मिर्च के थोक व्यापारी अमरीशलाल बरोट   का कहना है कि उत्पादन कम रहने और मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण इस वर्ष बाजार में मजबूती बनी हुई है। यदि नई फसल की आवक पर्याप्त नहीं हुई तो दरों में और तेजी आ सकती है।
हळदी (हल्दी) के बाजार का हाल -पिछले वर्ष भाव: ₹125 से ₹175 प्रति किल इस वर्ष उत्पादन प्रभावित। प्रमुख उत्पादन राज्य महाराष्ट्र, तमिलनाडु ,तेलंगाना है ।महाराष्ट्र में अवकाळी बारिश के कारण हल्दी की फसल को नुकसान हुआ है।तेलंगाना में पिछले वर्ष कम दाम मिलने से किसानों ने इस बार उत्पादन घटा दिया, जिसका असर इस साल बाजार पर दिखाई दे रहा है।
घरेलू बजट पर असर
गर्मी के मौसम में घर-घर में मसाले तैयार करने की परंपरा है। मिर्ची और हल्दी के बढ़े हुए दामों से घरेलू बजट पर सीधा असर पड़ रहा है। यदि फरवरी में बाजार में पर्याप्त आवक नहीं बढ़ी, तो मसाले और महंगे हो सकते हैं।
आगे की संभावना- क्रॉप कम होने से बाजार में मजबूती बनी हुई है।फरवरी में आवक नहीं बढ़ी तो दामों में और तेजी संभव। मिर्ची और हल्दी दोनों में आने वाले महीनों में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना।
कम उत्पादन, कम आवक और किसानों द्वारा घटाई गई बोआई के कारण मुंबई Apmc मसाला मार्केट में इस समय तेजी का माहौल है। आने वाले समय में कीमतों की दिशा फसल की आवक और मौसम की स्थिति पर निर्भर करेगी।